सरकारी जल संरक्षण अभियान पर बदहाली का तमाचा बना तेलिया पोखरा करोड़ों के अभियान के बीच उपेक्षा की मार झेल रहा नगर का प्राचीन जलस्रोत, जिम्मेदार मौनचितबड़ागांव। केंद्र व प्रदेश सरकार जहां “जल है तो कल है” का संदेश देकर तालाबों और पोखरों के संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं नगर पंचायत चितबड़ागांव के वार्ड नंबर 6 पटेल नगर स्थित प्राचीन तेलिया पोखरा सरकारी दावों की हकीकत बयां कर रहा है। नगर के बीचोंबीच स्थित यह ऐतिहासिक पोखरा आज गंदगी, जलकुंभी और उपेक्षा के दलदल में समाता जा रहा है।कभी नगरवासियों के लिए जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का प्रमुख आधार रहा तेलिया पोखरा अब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। पोखरे के चारों तरफ फैली गंदगी, उगी झाड़ियां और सड़ांध स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है। हालत यह है कि पोखरे का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार जल संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन धरातल पर प्राचीन जलस्रोतों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। नगर पंचायत के बीच स्थित होने के बावजूद तेलिया पोखरा वर्षों से सफाई और सौंदर्यीकरण की बाट जोह रहा है। लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि करोड़ों की योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं।पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते पोखरे का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह समाप्त हो सकती है। इससे भूजल स्तर पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा और सरकार का जल संरक्षण अभियान सिर्फ नारों तक सीमित होकर रह जाएगा।नगरवासियों ने प्रशासन और नगर पंचायत से मांग की है कि तेलिया पोखरा की तत्काल साफ-सफाई कराकर उसका संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण कराया जाए, ताकि नगर की इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाया जा सके।

